आज के दौर में इंसान सब कुछ कमा सकता है. लेकिन मन की शांति नहीं.मन की शांति के लिए हमें कुछ वक़्त एकांत गुजरना होता है, प्रकृति के समीप जाना होता है. लेकिन आज का भौतिक संसार सिर्फ शोर शराबे से और दिखावे से भरा है. हम प्रकृति से दूर हो गए है. शरीर काम करने की मशीन बन गया है. हर रोज़ काम करते करते हम अपने लिए वक़्त नहीं निकल पाते है. इसी वजह से थकान, चिड़चिड़ाहट, मस्तिष्क की परेशानी से घिर चुके है. आज के वक़्त में हमारे पास इतना सा भी समय नहीं है की हम अपने मन को शांत कर इन सभी परेशानियों से बहार निकल सके. दवाई इनके असर को काम कर देती है तो हमें दूसरी बीमारियो का आदी भी बना देती है, अगर हम इन सबसे निकल सके तो,
हम अपने मन को शांत रख सके तो !
अपनी बीमारियो से निजात पाकर सुखी जीवन जी सके तो !
अपने कार्य में सफलता और शिक्षा में उच्च ज्ञान को आसानी से समझ सके तो !
हर तरह से कामयाब बन सके तो !
हम ऐसा कर सकते है. अपने मन को शांत कर सकते है. ऐसा हम कर सकते है कई माध्यम से जैसे नियमित योग, ध्यान, त्राटक या व्यायाम करे तो. शरीर स्वस्थ हो इसलिए व्यायाम जरुरी है लेकिन मन को अगर दृढ़चित्त बनाना है तो ध्यान या त्राटक सबसे बेहतर माध्यम है. योग भी इसमें कुछ हद तक मदद करता है जैसे की तनाव से बाहर निकलने में और आपके स्वस्थ रहने में.
ध्यान और त्राटक का कार्य एक ही है आपके मन को एकाग्र करना मन भटकना ही तनाव का कारण है.
विचारो की संख्या को नियत्रित कर हम अपने मन को काबू कर सकते है.
मन को काबू करना निम्न चरण में होता है.
पहला मन में विचारो की संख्या का नियंत्रण.
दूसरा जब विचारो की संख्या न्यूनतम होती है तब उन्हें एक दिशा देना.
तीसरा जब दिशा देने में सफल हो जाते है तब एक ही विचार में सभी विचारो का समागम या फिर विचारशून्य की अवस्था.
ध्यान उन व्यक्ति के लिए उपयोगी होता है जो विचारो को दिशा दे सके. इसके विपरीत अगर आपके कोशिश करने के बाद भी आपके विचार काबू में नहीं होते है तो आप त्राटक से शुरू कर सकते है.
दोनों ही माध्यम से आप मन को शांत कर सकते है. त्राटक बाह्य ध्यान है जब की ध्यान में हम आँखे बंद कर अपने मन को तलाशते है, अपने विचारो को ढूंढने से लेकर शून्यता की अवस्था की यात्रा करते है.
कहा गया है मन की शक्ति का कोई छोर नहीं है. जरुरत है बस विश्वास और मन पर नियंत्रण की. मन पर नियंत्रण करना ज्यादा मुश्किल नहीं है, जरुरत है बस नियमित अभ्यास की. नियमित अभ्यास और एक तय वक़्त पर अभ्यास कर आप सब कुछ कर सकते है,मन में कई तरह से विचार आते है और सभी विचार पुरे नहीं हो पाते है. इसे हम सामान्य तोर पर हलके में ले लेते है. लेकिन असलमे ये हमारी आत्मशांति का नाश करती है.और हम अपने लक्ष्य में सफलता हासिल नहीं कर पाते है. इसलिए मन में विचारो की संख्या को घटाया जाता है, इसके कई माध्यम है. लेकिन मंजिल एक है ध्यान.
ध्यान :- शरीर की हलचल शांत कर जब मन को एकाग्र किया जाता है.तब एक अवस्था ऐसी आती है जब मष्तिष्क बिलकुल शांत और हल्का लगने लगता है.शरीर में नयी ऊर्जा का प्रवाह महसूस होने लगता है,इस अवस्था में हम सिर्फ एक विचार पर ही स्थिर हो जाते है.
फायदा:_
१. ध्यान से हमारे सोचने और कार्य करने की क्षमता का विकाश होता है.
२. जीवन की सबसे बड़ी कामयाबी आत्मविश्वास( खुद पर विश्वास) बढ़ता है.
३. जब हम ध्यान में सफलता हासिल करते है तब मन हर वक़्त शांत रहता है, चेहरे पर ख़ुशी,और आकर्षक व्यक्तित्व का निर्माण होता है.
४. जब भी मन में हलचल हो जरुरी नहीं की ध्यान के लिए कही बैठना हो माहोल बनाना हो, आप कही भी चलते हुए खुली आँखों से या बंद आँखों से भी मन को शांत कर सकते है, ये बिलकुल एक कंप्यूटर में कमांड देने जैसा होता है कमांड दी और हो गया. इसके लिए एक खास अभ्यास की जरुरत होती है.
५. जो आगे बढ़ने में हिचकिचाते है उनके लिए ध्यान सबसे बढ़िया माध्यम है,जैसे ही मन में विचार आया और हम खुदबखुद उस रस्ते पर चल दिए.
६. जिनके सोचने समझने की शक्ति कमजोर है वो इसे आजमा कर आराम से और बेहतर सोच सकते है.
७. जिन्हे चश्मा लगता है और वक़्त के साथ बढ़ता जाता है,वो ध्यान और त्राटक से धीरे धीरे चश्मा छुड़ा सकते है.
कई बार काम में हमारा मन नहीं लगता है, या फिर माहोल कुछ ऐसा हो जाता है की आप उस माहोल में परेशान हो जाते है. ध्यान और त्राटक से आप माहोल के प्रभाव से मुक्त हो जाते है, माहोल चाहे कैसा भी अप्रिय हो आप उसके प्रभाव नहीं आते है.
जब इतने फायदे ध्यान से है त्राटक से है तो सभी इसे करना चाहते होंगे.
ध्यान कौन कर सकता है.
ध्यान वह इंसान इंसान कर सकता है जिसमे इच्छा हो ध्यान करने की, नियमित और नित्य एक तय वक़्त पर ध्यान कर उसके लाभ उठा सकते है.
ध्यान शुरू करने के कुछ नियम है ये नियम हर जगह लागू होते है.
१. ध्यान या त्राटक सुबह ज्यादा अच्छा रहता है, क्यों की माहोल शांत, साफ और पवित्र होता है, इस वक़्त में ब्रह्मामुहृत होता है. तो ये मष्तिष्क को ज्यादा चेतन रखता है.
२. ध्यान या त्राटक हमेशा तय वक़्त पर नियमित करना चाहिए
३. ध्यान या त्राटक के समयकाल में मन पर संयम और वाणी में मधुरता रखनी चाहिए. ज्यादा बोलने के बजाय जरुरत के हिसाब से बोलना चाहिए.
४. आप जितना शांत रहते है उतना ही अपने अंदर जाते है.अपने आप से जुड़ते है.
अगर आप इनमे से किसी भी पक्ष को अपनाना चाहते है तो आप शुरुआत कर सकते है.
हम अपने मन को शांत रख सके तो !
अपनी बीमारियो से निजात पाकर सुखी जीवन जी सके तो !
अपने कार्य में सफलता और शिक्षा में उच्च ज्ञान को आसानी से समझ सके तो !
हर तरह से कामयाब बन सके तो !
हम ऐसा कर सकते है. अपने मन को शांत कर सकते है. ऐसा हम कर सकते है कई माध्यम से जैसे नियमित योग, ध्यान, त्राटक या व्यायाम करे तो. शरीर स्वस्थ हो इसलिए व्यायाम जरुरी है लेकिन मन को अगर दृढ़चित्त बनाना है तो ध्यान या त्राटक सबसे बेहतर माध्यम है. योग भी इसमें कुछ हद तक मदद करता है जैसे की तनाव से बाहर निकलने में और आपके स्वस्थ रहने में.
ध्यान और त्राटक का कार्य एक ही है आपके मन को एकाग्र करना मन भटकना ही तनाव का कारण है.
विचारो की संख्या को नियत्रित कर हम अपने मन को काबू कर सकते है.
मन को काबू करना निम्न चरण में होता है.
पहला मन में विचारो की संख्या का नियंत्रण.
दूसरा जब विचारो की संख्या न्यूनतम होती है तब उन्हें एक दिशा देना.
तीसरा जब दिशा देने में सफल हो जाते है तब एक ही विचार में सभी विचारो का समागम या फिर विचारशून्य की अवस्था.
ध्यान उन व्यक्ति के लिए उपयोगी होता है जो विचारो को दिशा दे सके. इसके विपरीत अगर आपके कोशिश करने के बाद भी आपके विचार काबू में नहीं होते है तो आप त्राटक से शुरू कर सकते है.
दोनों ही माध्यम से आप मन को शांत कर सकते है. त्राटक बाह्य ध्यान है जब की ध्यान में हम आँखे बंद कर अपने मन को तलाशते है, अपने विचारो को ढूंढने से लेकर शून्यता की अवस्था की यात्रा करते है.
कहा गया है मन की शक्ति का कोई छोर नहीं है. जरुरत है बस विश्वास और मन पर नियंत्रण की. मन पर नियंत्रण करना ज्यादा मुश्किल नहीं है, जरुरत है बस नियमित अभ्यास की. नियमित अभ्यास और एक तय वक़्त पर अभ्यास कर आप सब कुछ कर सकते है,मन में कई तरह से विचार आते है और सभी विचार पुरे नहीं हो पाते है. इसे हम सामान्य तोर पर हलके में ले लेते है. लेकिन असलमे ये हमारी आत्मशांति का नाश करती है.और हम अपने लक्ष्य में सफलता हासिल नहीं कर पाते है. इसलिए मन में विचारो की संख्या को घटाया जाता है, इसके कई माध्यम है. लेकिन मंजिल एक है ध्यान.
ध्यान :- शरीर की हलचल शांत कर जब मन को एकाग्र किया जाता है.तब एक अवस्था ऐसी आती है जब मष्तिष्क बिलकुल शांत और हल्का लगने लगता है.शरीर में नयी ऊर्जा का प्रवाह महसूस होने लगता है,इस अवस्था में हम सिर्फ एक विचार पर ही स्थिर हो जाते है.
फायदा:_
१. ध्यान से हमारे सोचने और कार्य करने की क्षमता का विकाश होता है.
२. जीवन की सबसे बड़ी कामयाबी आत्मविश्वास( खुद पर विश्वास) बढ़ता है.
३. जब हम ध्यान में सफलता हासिल करते है तब मन हर वक़्त शांत रहता है, चेहरे पर ख़ुशी,और आकर्षक व्यक्तित्व का निर्माण होता है.
४. जब भी मन में हलचल हो जरुरी नहीं की ध्यान के लिए कही बैठना हो माहोल बनाना हो, आप कही भी चलते हुए खुली आँखों से या बंद आँखों से भी मन को शांत कर सकते है, ये बिलकुल एक कंप्यूटर में कमांड देने जैसा होता है कमांड दी और हो गया. इसके लिए एक खास अभ्यास की जरुरत होती है.
५. जो आगे बढ़ने में हिचकिचाते है उनके लिए ध्यान सबसे बढ़िया माध्यम है,जैसे ही मन में विचार आया और हम खुदबखुद उस रस्ते पर चल दिए.
६. जिनके सोचने समझने की शक्ति कमजोर है वो इसे आजमा कर आराम से और बेहतर सोच सकते है.
७. जिन्हे चश्मा लगता है और वक़्त के साथ बढ़ता जाता है,वो ध्यान और त्राटक से धीरे धीरे चश्मा छुड़ा सकते है.
कई बार काम में हमारा मन नहीं लगता है, या फिर माहोल कुछ ऐसा हो जाता है की आप उस माहोल में परेशान हो जाते है. ध्यान और त्राटक से आप माहोल के प्रभाव से मुक्त हो जाते है, माहोल चाहे कैसा भी अप्रिय हो आप उसके प्रभाव नहीं आते है.
जब इतने फायदे ध्यान से है त्राटक से है तो सभी इसे करना चाहते होंगे.
ध्यान कौन कर सकता है.
ध्यान वह इंसान इंसान कर सकता है जिसमे इच्छा हो ध्यान करने की, नियमित और नित्य एक तय वक़्त पर ध्यान कर उसके लाभ उठा सकते है.
ध्यान शुरू करने के कुछ नियम है ये नियम हर जगह लागू होते है.
१. ध्यान या त्राटक सुबह ज्यादा अच्छा रहता है, क्यों की माहोल शांत, साफ और पवित्र होता है, इस वक़्त में ब्रह्मामुहृत होता है. तो ये मष्तिष्क को ज्यादा चेतन रखता है.
२. ध्यान या त्राटक हमेशा तय वक़्त पर नियमित करना चाहिए
३. ध्यान या त्राटक के समयकाल में मन पर संयम और वाणी में मधुरता रखनी चाहिए. ज्यादा बोलने के बजाय जरुरत के हिसाब से बोलना चाहिए.
४. आप जितना शांत रहते है उतना ही अपने अंदर जाते है.अपने आप से जुड़ते है.
अगर आप इनमे से किसी भी पक्ष को अपनाना चाहते है तो आप शुरुआत कर सकते है.